पीएम मोदी ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 813वें उर्स पर भेजी खास चादर, जानिए इस परंपरा के महत्व और विवाद।

Ajmer Dargah : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर साल की तरह इस साल भी अजमेर शरीफ स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चादर भेज रहे हैं। पीएम ने गुरुवार को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू और बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी को चादर सौंप दी है। आज वे इस खास चादर को निजामुद्दीन स्थित हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर लेकर जाएंगे, और उसके बाद इसे अजमेर दरगाह पर भेजा जाएगा।

सूफी फाउंडेशन के प्रमुख और अजमेर दरगाह के गद्दी नशीं हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने बताया कि देश के प्रधानमंत्री द्वार चादर भेजने की परंपरा 1947 से चली आ रही है। केंद्रीय मंत्री रिजिजू और बीजेपी नेता जमाल सिद्दीकी सुबह 9.30 बजे इस चादर को लेकर निजामुद्दीन दरगाह पहुंचेंगे। ऐसा लगातार 11वीं बार है जब प्रधानमंत्री अजमेर दरगाह पर चादर भेज रहे हैं।

प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी भी लगातार दरगाह पर चादर भेजते आए हैं। उन्होंने गुरुवार को ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 'उर्स' पर लोगों का अभिवादन किया और सभी के जीवन में खुशहाली और शांति की कामना की।

पीएम ने की खुशहाली और शांति की कामना!

पीएम मोदी ने कहा, "ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के उर्स पर अभिवादन। यह अवसर सभी के जीवन में खुशहाली और शांति लाए।" पीएम द्वारा उन्हें और बीजेपी नेता जमाल सिद्दीकी को चादर भेंट किए जाने की तस्वीर शेयर करते हुए केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा, "यह भाव भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत और सद्भाव और करुणा के स्थायी संदेश के प्रति उनके गहरे सम्मान को दर्शाता है।"

पिछले साल 812वें उर्स के मौके पर प्रधानमंत्री ने ये खास चादर तत्कालीन अल्पसंख्यक मंत्री स्मृति ईरानी और बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रमुख जमाल सिद्दीकी को सौंपी थी। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल से भी पीएम ने मुलाकात की थी, जिसकी तस्वीर उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर शेयर की थी।

क्या है चादर चढ़ाने की खासियत?

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का 813वां उर्स आने के साथ ही अजमेर दरगाह श्रद्धालुओं से भर जाता है। 28 दिसंबर से चल रहे उर्स के मौके पर देश-विदेश से हजारों की संख्या में ख्वाजा को मानने वाले लोग दरगाह पर पहुंचते हैं, और चादर चढ़ाकर अपनी मन्नतें मांगते हैं। यह पारंपरिक चादर, दरगाह शरीफ पर स्नेह और सम्मान का प्रतीक है और ख्वाजा गरीब नवाज से आशीर्वाद पाने का एक जरिया माना जाता है।

हिंदू सेना दरगाह के खिलाफ पहुंचा कोर्ट॥

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दरगाह पर चादर भेजने को लेकर हिंदू सेना की नाराजगी भी सामने आई है। इस संगठन के प्रमुख विष्णु गुप्ता ने विवाद के अदालत में लंबित होने और मामले के निपटारे तक दरगाह पर चादर भेजने की परंपरा पर रोक लगाने की अपील की। गौरतलब है कि हिंदू सेना प्रमुख ने अजमेर की जिला अदालत में दरगाह में संकट मोचन महादेव के शिव मंदिर पर दावा करते हुए मुकदमा दायर किया था। इस मामले की अगली सुनवाई 24 जनवरी को होनी है।

विष्णु गुप्ता ने कथित अपनी एक चिट्ठी में कहा, "देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने हर साल अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ाने की शुरुआत की थी और तब से यह औपचारिकता जारी है, यहां तक कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री रहते हुए भी यह चल रहा है।" उन्होंने कथित रूप से कहा कि चादर भेजने से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन वह एक संवैधानिक पर रहते हुए चादर भेज रहे हैं, तो इससे उनके द्वारा फाइल किए गए केस पर असर पड़ेगा।

अदालत ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब॥

पिछले साल 27 नवंबर को अजमेर की एक स्थानीय अदालत ने दरगाह में शिव मंदिर होने के दावे की सुनवाई के लिए तीन पक्षों को नोटिस जारी किया था। इस कानूनी जंग के बीच अजमेर शरीफ दरगाह कमिटी ने भी 20 दिसंबर को मुनसिफ अदालत में याचिका दायर की, जिसमें इस दावे को खारिज करने की मांग की गई, और उनके पक्ष को सुने बगैर कोई आदेश जारी न किए जाने की अपील की गई थी।

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