Google अल्फाबेट का अनोखा प्रयोग: 3.2 करोड़ खास मच्छरों को आबादी में छोड़ने की तैयारी, मांगी सरकारी मंजूरी।
Google की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट ने एक महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत प्रयोगशाला में लगभग 3.2 करोड़ विशेष मच्छरों को तैयार किया है। कंपनी ने इन्हें अमेरिकी समुदायों में छोड़ने के लिए सरकार से अनुमति का अनुरोध किया है। इस परियोजना में अत्याधुनिक तकनीक और स्वचालित रोबोटिक सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, जिनकी मदद से बड़ी संख्या में मच्छरों का पालन-पोषण किया गया।
योजना के तहत इन मच्छरों को विशेष मोबाइल यूनिट्स के जरिए विभिन्न क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह पहल वेस्ट नाइल वायरस और सेंट लुइस एन्सेफलाइटिस जैसी मच्छरजनित बीमारियों के प्रसार को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकती है।
खास हैं लैब में बनाए गए मच्छर॥
- TOI टेक की रिपोर्ट के अनुसार, गूगल ने लैब में जिन मच्छरों को तैयार किया है, वो खास हैं। इन्हें 'डीबग' प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया गया है और ये इंसानों को नहीं काटते। यानी इनसे इंसानों को कोई खतरा नहीं है।
- गूगल ने साल 2016 में अपना प्रोजेक्ट शुरू किया था। वह पहले भी लैब में तैयार किए गए मच्छरों को वातावरण में छोड़ चुकी है।
- सरकारी एजेंसियां गूगल के आवेदन पर विचार कर रही हैं। आम लोगों से भी इस संबंध में राय मांगी गई है। हालांकि अभी फाइनल फैसला होना बाकी है और उसके बाद लैब में डेवलप मच्छरों को छोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
आबादी के बीच रहकर करेंगे क्या काम?
गूगल के पाले गए मच्छर इंसानों को नहीं काटते। ये सभी मेल मच्छर हैं। तकनीक का उपयोग करके इन्हें वोल्बाचिया (Wolbachia) नाम के प्राकृतिक वायरस से संक्रमित किया गया है। जब ये मच्छर वातावरण में मौजूद मादा मच्छरों से संबंध बनाएंगे तो उनके अंडे डेवलप नहीं होंगे और उनसे बच्चे नहीं निकलेंगे। इससे लोगों को काटने वाले मच्छरों की आबादी धीरे-धीरे घटने लग जाएगी।
गूगल का AI और रोबोटिक्स संभालेगा मोर्चा॥
लोगों को मच्छरों से काटने पर होने वाली बीमारियों से बचाने के लिए पहले भी ऐसे उपाए हुए हैं। इसके फायदे देखे गए थे। लेकिन बड़ी संख्या में मच्छरों को लैब में डेवलप करना जिम्मेदारी वाला काम है और टेक दिग्गज गूगल की पैरंट कंपनी अल्फाबेट इसे अब पूरा कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, गूगल का ‘डीबग’ प्रोजेक्ट एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रहा है। लैब में नर मच्छरों के साथ मादा मच्छर भी होती हैं। आबादी में नर मच्छरों को छोड़ने से पहले गूगल का AI बेस्ड सिस्टम नर मच्छरों को अलग कर देता है।
- ऑटोमेटेड रोबोट्स: मच्छरों को बहुत बड़े पैमाने पर पालने और उनकी देखरेख का काम ऑटोमैटिक रोबोट्स करते हैं।
- स्पेशल गाड़ियां: मच्छरों को सुरक्षित तरीके से सही इलाकों में ले जाकर रिलीज करने के लिए मोबाइल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल किया जाता है।
2 साल चलेगा ट्रायल॥
अल्फाबेट का ट्रायल पूरे दो साल चलेगा। मंजूरी मिलने के बाद अलग-अलग चरणों में इसे पूरा किया जाएगा।

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